नमस्ते दोस्तों! क्या आप भी मेरी तरह इतिहास की गहराइयों में गोते लगाना पसंद करते हैं? मुझे याद है, जब मैं पहली बार दक्षिण कोरिया के बुयेओ में मौजूद बेकजे सांस्कृतिक विरासत स्थलों पर गई थी, तो मेरा मन मोहित हो गया था। ये सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं हैं, बल्कि यहाँ हर पत्थर, हर दीवार एक कहानी कहती है – बेकजे साम्राज्य की शान और उनके कलाकारों की अद्भुत कला की। आजकल जहाँ हम सब डिजिटल दुनिया में खोए रहते हैं, वहाँ ऐसी जगहों पर जाना एक अलग ही सुकून देता है, हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। यह हमें बताता है कि कैसे हमारी संस्कृतियाँ विकसित हुई हैं और आधुनिक समय में भी उन्हें कितनी खूबसूरती से सहेजा जा रहा है। अगर आप भी इस प्राचीन विरासत के अनसुने किस्सों और उसके आज के महत्व के बारे में जानना चाहते हैं, तो चलिए, इसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।
प्राचीन राजधानी साबी का वैभव

बेकजे के गौरवशाली इतिहास की झलक
बुयेओ को बेकजे साम्राज्य की आखिरी राजधानी ‘साबी’ के नाम से जाना जाता था। मुझे सच में ये जगह देखकर एक अलग ही एहसास हुआ, जैसे मैं समय में पीछे चली गई हूँ। यहाँ आकर मुझे महसूस हुआ कि कैसे इस साम्राज्य ने अपनी पहचान बनाई थी, कैसे उसने अपनी कला, संस्कृति और ज्ञान को दूर-दूर तक फैलाया था। यह सिर्फ राजा-महाराजाओं की कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उन आम लोगों की मेहनत और कला भी है जिन्होंने इसे इतना भव्य बनाया। यहाँ की हर एक जगह आपको कुछ न कुछ सिखाती है, चाहे वो महल के अवशेष हों या मंदिर की सीढ़ियाँ। इस जगह का इतिहास सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी आँखों के सामने जीवित हो उठता है, और आपको महसूस कराता है कि आप भी इस महान यात्रा का हिस्सा हैं। यहाँ के खंडहरों में भी एक अजीब सी चमक है जो आपको अतीत के साथ जोड़े रखती है।
सांस्कृतिक केंद्र के रूप में साबी का योगदान
बेकजे काल में साबी सिर्फ एक राजधानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक केंद्र था जहाँ से ज्ञान, कला और बौद्ध धर्म पूरे पूर्वी एशिया में फैला। यह देखकर मुझे बहुत गर्व हुआ कि कैसे एक छोटा सा साम्राज्य इतना प्रभावशाली हो सकता था। जापानी संस्कृति पर बेकजे का गहरा असर आज भी देखा जा सकता है। मुझे याद है, जब मैंने गुंगनामजी तालाब के पास बैठकर सोचा, तो मुझे लगा कि यहाँ से कितने ही विचारों और कलाकृतियों ने जापान की धरती तक का सफर तय किया होगा। यह दर्शाता है कि उस समय भी लोग कितने खुले विचारों वाले थे और कैसे एक-दूसरे से सीखना पसंद करते थे। यह उस समय के वैश्विक संबंधों का एक अद्भुत उदाहरण है जो हमें बताता है कि हम इतिहास से कितना कुछ सीख सकते हैं।
पांच मंजिला पत्थर का स्तूप: बेकजे का स्थापत्य चमत्कार
जियोंगनिमसाजी मंदिर का बेजोड़ आकर्षण
जियोंगनिमसाजी मंदिर के सामने खड़ा पांच मंजिला पत्थर का स्तूप (जियोंगनिमसाजी ओचेयुंग सेओक्ताप) पहली बार देखने पर ही मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। यह स्तूप बेकजे वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है जो आज भी शान से खड़ा है। जब मैं इसके करीब गई, तो मुझे लगा कि इसे बनाने वाले कारीगरों में कितनी कलात्मकता और धैर्य रहा होगा। पत्थर के इतने बड़े-बड़े टुकड़ों को तराशकर इतनी बारीकी से लगाना, सच में किसी जादू से कम नहीं है। इसकी संरचना में एक संतुलन और शांति है जो आपको अपनी ओर खींच लेती है। मुझे इस बात पर बहुत हैरानी हुई कि यह स्तूप इतने सालों से कैसे इतनी अच्छी तरह से टिका हुआ है, मानो यह समय को चुनौती दे रहा हो। इसकी सादगी में भी एक भव्यता है जो बेकजे के लोगों की सौंदर्य बोध को दर्शाती है।
अद्वितीय निर्माण शैली और ऐतिहासिक महत्व
यह स्तूप सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि बेकजे की इंजीनियरिंग और कलात्मक क्षमता का एक जीता-जागता प्रमाण है। इसकी निर्माण शैली उस समय के वास्तुशिल्पियों की दूरदर्शिता को दर्शाती है। मुझे याद है, जब मैंने इसे ध्यान से देखा, तो मुझे लगा कि हर एक पत्थर में एक कहानी छिपी है, हर एक परत में इतिहास की गूँज है। इसका महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह बेकजे साम्राज्य के पतन के बाद भी उस काल की याद दिलाता है। इसे देखकर मैं कल्पना करने लगी कि कैसे उस समय के लोग इस स्तूप के चारों ओर इकट्ठा होते होंगे, प्रार्थना करते होंगे और अपने जीवन की खुशी और गम साझा करते होंगे। यह सिर्फ पत्थर का ढेर नहीं, बल्कि उस समय के जीवन का एक आईना है।
लॉटस का स्वर्ग: गुंगनामजी तालाब और आसपास के स्थल
शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य
गुंगनामजी तालाब, जिसे बेकजे के पहले कृत्रिम तालाब के रूप में जाना जाता है, ने मेरा मन मोह लिया। यह जगह इतनी शांत और खूबसूरत है कि यहाँ आकर आपको शहरी भागदौड़ से एकदम अलग महसूस होता है। मुझे याद है, जब मैंने तालाब के चारों ओर खिले हुए कमल के फूलों को देखा, तो मुझे लगा जैसे मैं किसी स्वर्ग में आ गई हूँ। पानी में महल का प्रतिबिंब और आसपास की हरी-भरी प्रकृति आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। यहाँ की हवा में एक ताजगी है जो आपके मन को सुकून देती है। मुझे यहाँ बैठकर बेकजे के राजा मु की प्रेम कहानी के बारे में सोचने का मौका मिला, जिसने इस तालाब को अपनी रानी के लिए बनवाया था। ऐसी जगहों पर आकर इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
बेकजे के शाही बागवानी का उत्कृष्ट उदाहरण
गुंगनामजी तालाब बेकजे के शाही बागवानी का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह बताता है कि उस समय के लोग प्रकृति को कितना महत्व देते थे और उसे कितनी खूबसूरती से सजाना जानते थे। तालाब के बीच में बने द्वीप और उस तक पहुँचने वाले पुल, सब कुछ इतनी कलात्मकता से बनाया गया है कि मुझे वाकई में आश्चर्य हुआ। जब मैंने यहाँ घूमते हुए उन छोटे-छोटे पुलों पर कदम रखा, तो मुझे लगा कि उस समय के कारीगरों ने कितनी बारीकी से हर चीज का ध्यान रखा होगा। यह जगह न सिर्फ देखने में सुंदर है, बल्कि यह हमें बेकजे के लोगों की जीवनशैली और उनके सौंदर्य बोध के बारे में भी बहुत कुछ बताती है। यहाँ आकर आपको एक पल के लिए भी नहीं लगता कि आप एक ऐतिहासिक स्थल पर हैं, बल्कि ऐसा लगता है जैसे आप किसी जीवंत कलाकृति का हिस्सा बन गए हैं।
न्योसेओंगसान पर्वत: बेकजे की अंतिम लड़ाई का गवाह
नखुवाम रॉक और दुखद गाथा
न्योसेओंगसान पर्वत पर मौजूद नखुवाम रॉक (फूलों का पत्थर) की कहानी सुनकर मेरी आँखें नम हो गईं। यह वो जगह है जहाँ बेकजे की सैकड़ों महिलाएँ दुश्मनों से अपनी इज्जत बचाने के लिए कूद गई थीं। यह सिर्फ एक पत्थर नहीं है, बल्कि बेकजे की महिलाओं के साहस और बलिदान का प्रतीक है। मुझे याद है, जब मैं वहाँ खड़ी थी, तो मैंने उस समय की महिलाओं की पीड़ा और उनके मजबूत इरादों को महसूस किया। यह एक ऐसा दुखद इतिहास है जो हमें बेकजे के अंत की कहानी बताता है, लेकिन साथ ही उन लोगों की हिम्मत को भी दर्शाता है जिन्होंने अपने सम्मान के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। यह जगह हमें इतिहास के उन पन्नों को याद दिलाती है जिन्हें कभी भूला नहीं जा सकता।
सांस्कृतिक महोत्सव और बेकजे का पुनरुत्थान
आजकल न्योसेओंगसान पर्वत बेकजे सांस्कृतिक महोत्सव का केंद्र बन गया है, जहाँ हर साल उस महान साम्राज्य की याद में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है कि हम अपने इतिहास को सिर्फ किताबों में नहीं रखते, बल्कि उसे उत्सवों के माध्यम से जीवित रखते हैं। इस महोत्सव के दौरान मुझे बेकजे के पारंपरिक नृत्य, संगीत और वेशभूषा देखने का मौका मिला, जो सच में अद्भुत था। यह महोत्सव हमें बेकजे की कला और संस्कृति को गहराई से समझने में मदद करता है। यह दिखाता है कि कैसे एक दुखद अंत के बावजूद, बेकजे की आत्मा आज भी दक्षिण कोरियाई लोगों के दिलों में जीवित है और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।
पुरातत्व संग्रहालय: बेकजे के खजाने का अनावरण
उत्खनित कलाकृतियों का अद्भुत संग्रह

बुयेओ राष्ट्रीय संग्रहालय में बेकजे साम्राज्य की अनमोल कलाकृतियाँ देखकर मैं दंग रह गई। यहाँ इतनी सारी चीजें हैं जो उस समय के लोगों के जीवन, उनकी कला और उनकी सोच को दर्शाती हैं। मुझे याद है, जब मैंने बेकजे के सोने के मुकुट देखे, तो उनकी बारीकी और भव्यता ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। ये सिर्फ गहने नहीं हैं, बल्कि उस समय के कारीगरों की अद्भुत शिल्प कौशल का प्रमाण हैं। यहाँ आपको मिट्टी के बर्तन, पत्थर की मूर्तियाँ और उस समय के औजार भी देखने को मिलते हैं, जो आपको उस काल के सामाजिक और आर्थिक जीवन की एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं। यह संग्रहालय एक खजाने की तरह है जहाँ बेकजे का हर पहलू सजीव हो उठता है।
बेकजे की वैश्विक पहचान
यह संग्रहालय हमें बताता है कि बेकजे का प्रभाव सिर्फ कोरिया तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरे एशिया में फैला हुआ था। मुझे यहाँ ऐसी कलाकृतियाँ भी मिलीं जो चीन और जापान के साथ बेकजे के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती हैं। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि बेकजे उस समय कितना शक्तिशाली और प्रभावशाली साम्राज्य था। यहाँ रखी हर चीज एक कहानी कहती है, एक ऐसी कहानी जो हमें बताती है कि कैसे एक प्राचीन सभ्यता ने दुनिया के बड़े हिस्से को प्रभावित किया। मुझे लगता है कि हर किसी को यहाँ आकर बेकजे के इस अद्भुत खजाने को देखना चाहिए और इस महान साम्राज्य की विरासत को समझना चाहिए।
बेकजे की वास्तुकला और उसका स्थायी प्रभाव
बुद्ध धर्म और वास्तुकला का गहरा रिश्ता
बेकजे की वास्तुकला में बुद्ध धर्म का गहरा प्रभाव साफ दिखता है। मुझे याद है, जब मैं जियोंगनिमसाजी मंदिर या मीरुकसाजी मंदिर (इक्सान में, बुयेओ के करीब) जैसी जगहों पर गई थी, तो मैंने देखा कि कैसे बौद्ध धर्म ने उनके डिजाइन और संरचना को आकार दिया था। स्तूपों की भव्यता और मंदिरों की शांतिपूर्ण संरचना में बौद्ध दर्शन की झलक मिलती है। यह सिर्फ ईंटों और पत्थरों का ढेर नहीं है, बल्कि आस्था और कला का एक अनूठा मिश्रण है। मुझे लगता है कि बेकजे के कारीगरों ने अपनी कला के माध्यम से अपनी गहरी धार्मिक भावनाओं को व्यक्त किया था, और यही कारण है कि उनकी वास्तुकला आज भी हमें इतनी शांति और प्रेरणा देती है।
आज की दुनिया में बेकजे की विरासत
बेकजे की वास्तुकला का प्रभाव आज भी दक्षिण कोरिया की आधुनिक इमारतों और कलाकृतियों में देखा जा सकता है। मुझे लगता है कि अपनी जड़ों को याद रखना कितना महत्वपूर्ण है, और बेकजे की वास्तुकला हमें यही सिखाती है। उनकी सादगी, संतुलन और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग आज भी डिजाइनरों को प्रेरित करता है। मैंने खुद देखा है कि कैसे आज भी कुछ इमारतों में बेकजे शैली की छलक मिलती है। यह विरासत सिर्फ पत्थरों में नहीं, बल्कि लोगों के विचारों और उनकी कलात्मकता में भी जीवित है। बेकजे हमें सिखाता है कि कैसे एक महान सभ्यता की देन समय की कसौटी पर खरी उतरती है और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहती है।
| विरासत स्थल का नाम | मुख्य विशेषता | ऐतिहासिक महत्व |
|---|---|---|
| जियोंगनिमसाजी मंदिर का पांच मंजिला पत्थर का स्तूप | बेकजे वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण, अद्वितीय निर्माण शैली | बेकजे के पतन के बाद भी अस्तित्व में रहा, बुद्ध धर्म का केंद्र |
| गुंगनामजी तालाब | कोरिया का पहला कृत्रिम तालाब, कमल के फूल और शाही बागवानी | बेकजे के राजा मु की प्रेम कहानी से जुड़ा, शाही आरामगाह |
| नखुवाम रॉक (न्योसेओंगसान पर्वत) | दुखद इतिहास, सैकड़ों बेकजे महिलाओं का बलिदान स्थल | बेकजे साम्राज्य के पतन और महिलाओं के साहस का प्रतीक |
| बुयेओ राष्ट्रीय संग्रहालय | बेकजे की अनमोल कलाकृतियों का संग्रह, सोने के मुकुट और बर्तन | बेकजे की कला, संस्कृति और वैश्विक संबंधों का प्रमाण |
मेरे अनुभव: बेकजे की धरती पर एक यादगार यात्रा
व्यक्तिगत जुड़ाव और सीख
मेरी बुयेओ की यात्रा सिर्फ एक पर्यटक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह मेरे लिए इतिहास से जुड़ने का एक बहुत ही व्यक्तिगत अनुभव था। मुझे याद है, जब मैंने उन प्राचीन स्थलों पर कदम रखा, तो मुझे लगा जैसे मैं उन लोगों के साथ खड़ी हूँ जो सदियों पहले यहाँ रहते थे। हर एक पत्थर, हर एक अवशेष मुझे कुछ न कुछ बता रहा था। मेरे लिए यह सिर्फ पुरानी इमारतें नहीं थीं, बल्कि उन लोगों की कहानियाँ थीं जिन्होंने यहाँ अपना जीवन जिया, प्यार किया, लड़ाई लड़ी और सपने देखे। इस यात्रा ने मुझे सिखाया कि इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि हमारे आसपास भी जीवित रहता है, बस हमें उसे देखने और महसूस करने की जरूरत है। मुझे वाकई में लगा कि मैं उस जगह से कुछ सीखकर और कुछ बेहतर होकर वापस लौटी हूँ।
आधुनिक यात्री के लिए बुयेओ का महत्व
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बुयेओ जैसी जगहें हमें एक ठहराव देती हैं, एक मौका देती हैं कि हम अपनी संस्कृति और इतिहास से फिर से जुड़ सकें। मुझे लगता है कि हर किसी को ऐसी जगहों पर जाना चाहिए, खासकर उन्हें जो इतिहास और संस्कृति से प्यार करते हैं। यह सिर्फ एक खूबसूरत जगह नहीं है, बल्कि एक शैक्षिक अनुभव भी है जो आपको बहुत कुछ सिखाता है। यहाँ आकर आप न केवल कुछ नया सीखते हैं, बल्कि आपको एक अद्भुत शांति और सुकून भी मिलता है। अगर आप भी मेरी तरह इतिहास में खो जाना पसंद करते हैं और एक ऐसी यात्रा चाहते हैं जो आपके मन को छू जाए, तो बुयेओ आपके लिए एकदम सही जगह है। यह आपको सिर्फ देखने का अनुभव नहीं देगा, बल्कि यह आपको सोचने पर भी मजबूर करेगा कि हम कहाँ से आए हैं और हमें कहाँ जाना है।
글 को समाप्त करते हुए
तो मेरे प्यारे दोस्तों, बेकजे की इन अद्भुत विरासतों के बारे में जानकर आपको कैसा लगा? मुझे तो सच में लगा कि ये सिर्फ प्राचीन अवशेष नहीं हैं, बल्कि समय के साथ चलती हुई कहानियाँ हैं जो हमें अपने गौरवशाली अतीत से जोड़े रखती हैं। ऐसी जगहों पर जाने से हमें न केवल इतिहास की गहरी समझ मिलती है, बल्कि यह हमारे मन को भी एक अलग ही शांति और प्रेरणा देती है। मुझे उम्मीद है कि मेरी यह यात्रा आपको भी अपनी जड़ों से जुड़ने और बेकजे के अनमोल खजानों को करीब से देखने के लिए प्रेरित करेगी। इन स्थलों की हर एक ईंट और पत्थर, एक महान सभ्यता की गवाही देता है, जो आज भी अपनी चमक बिखेर रहा है।
जानने योग्य उपयोगी जानकारी
1. बुयेओ की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय वसंत (अप्रैल-मई) या पतझड़ (सितंबर-अक्टूबर) का है, जब मौसम सुहावना होता है और आप खुले में आराम से घूम सकते हैं।
2. बेकजे सांस्कृतिक महोत्सव आमतौर पर अक्टूबर में आयोजित होता है, अगर आप उस दौरान यात्रा करते हैं तो आपको संस्कृति और उत्सव का एक शानदार अनुभव मिलेगा।
3. सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना बहुत आसान है। बुयेओ बस टर्मिनल से प्रमुख स्थलों तक स्थानीय बसें आसानी से मिल जाती हैं, जो आपके घूमने के अनुभव को और भी सुविधाजनक बनाती हैं।
4. कुछ स्थलों पर प्रवेश शुल्क लगता है, इसलिए अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इसकी जानकारी पहले से कर लें। कई जगहों पर एकीकृत टिकट भी मिलते हैं जो किफायती होते हैं।
5. बुयेओ में पारंपरिक कोरियाई भोजन का स्वाद लेना न भूलें, खासकर बेकजे काल से प्रेरित स्थानीय व्यंजन जो आपको एक अनूठा पाक अनुभव देंगे।
महत्वपूर्ण बातों का सार
बेकजे की विरासत: अतीत से वर्तमान तक
बेकजे की विरासत स्थलों की मेरी यह यात्रा सचमुच अविस्मरणीय थी। यहाँ मैंने जो कुछ भी देखा और महसूस किया, वह सिर्फ किताबों में पढ़ी गई बातें नहीं थीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास था जो मेरी आँखों के सामने सजीव हो उठा। बुयेओ की प्राचीन राजधानी साबी से लेकर जियोंगनिमसाजी मंदिर के पांच मंजिला स्तूप तक, और शांत गुंगनामजी तालाब से लेकर न्योसेओंगसान पर्वत पर नखुवाम रॉक की दुखद गाथा तक, हर जगह बेकजे के लोगों की अद्भुत कला, कौशल और दृढ़ता की कहानियाँ सुनाई देती हैं। बुयेओ राष्ट्रीय संग्रहालय में मिली कलाकृतियों ने तो मुझे हैरान ही कर दिया, उन्होंने दिखाया कि कैसे बेकजे ने पूरे पूर्वी एशिया को प्रभावित किया था।
सांस्कृतिक महत्व और भविष्य की प्रेरणा
यह सिर्फ इतिहास का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि एक प्रेरणा है कि कैसे एक सभ्यता इतनी भव्यता और ज्ञान के साथ जी सकती है। मैंने अपनी आँखों से देखा कि कैसे बेकजे की वास्तुकला और बौद्ध धर्म का प्रभाव आज भी दक्षिण कोरिया की संस्कृति में गहराई से समाया हुआ है। यह यात्रा हमें सिखाती है कि हमारी जड़ें कितनी महत्वपूर्ण हैं और उन्हें सहेज कर रखना कितना जरूरी है। मुझे लगता है कि हम सभी को अपने इतिहास और विरासत से जुड़ना चाहिए, क्योंकि यही हमें हमारी पहचान देता है और भविष्य के लिए राह दिखाता है। अगर आप भी मेरी तरह इतिहास के दीवाने हैं, तो बुयेओ की यात्रा आपके लिए एक अद्भुत अनुभव हो सकता है, जो आपको सोचने पर मजबूर करेगा और आपकी आत्मा को छू जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: दक्षिण कोरिया के बुयेओ में बेकजे सांस्कृतिक विरासत स्थल आखिर हैं क्या और इन्हें देखना इतना खास क्यों है?
उ: अरे दोस्तों, ये सिर्फ कुछ पुरानी इमारतें नहीं हैं! जब मैं वहां गई थी, तो मुझे लगा जैसे समय में पीछे चली गई हूं। बेकजे साम्राज्य, जो कभी बहुत शक्तिशाली था, उसकी राजधानी बुयेओ में ये स्थल उसकी कला, वास्तुकला और संस्कृति की अद्भुत मिसाल हैं। आप जानते हैं, बेकजे साम्राज्य का जापान और चीन पर भी काफी सांस्कृतिक प्रभाव था। इन स्थलों को यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है, और इसका मतलब है कि इनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता सिर्फ कोरिया के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। हर पत्थर, हर दीवार आपको उस समय के राजाओं, कलाकारों और आम लोगों की जिंदगी की झलक देते हैं। यहां आकर आपको एहसास होगा कि हम कितने समृद्ध इतिहास का हिस्सा हैं, और यह अनुभव दिल को छू लेने वाला होता है।
प्र: इन बेकजे विरासत स्थलों पर घूमने के दौरान हमें किस तरह के अनुभव मिल सकते हैं और क्या कुछ खास चीजें हैं जो देखनी चाहिए?
उ: सच कहूं तो, मेरे लिए यह एक जादुई अनुभव था! आप वहां जाकर सिर्फ ऐतिहासिक चीजें नहीं देखते, बल्कि उन्हें महसूस करते हैं। सबसे पहले, आप बुसोसानसेओंग किला (Busosanseong Fortress) जा सकते हैं, जहां से बुयेओ शहर का शानदार नज़ारा दिखता है। शाम को सूर्यास्त के समय तो यहां का दृश्य मन मोह लेता है। इसके बाद, आप नक्कीमसा मंदिर (Nakhwamasa Temple) और इसकी दुखद लेकिन वीर कहानी से रूबरू हो सकते हैं। गोरामाली स्मारक (Gwanbukjeong Pavilion) और बेकजे शाही tombs भी देखने लायक हैं। मैंने तो वहां के स्थानीय गाइड से बातें की थीं और उन्होंने मुझे कुछ ऐसी कहानियाँ सुनाईं जो किताबों में नहीं मिलतीं। वहां आप बेकजे संग्रहालय में उस समय की कलाकृतियां और जीवनशैली को करीब से देख सकते हैं। मुझे तो हर कोने में एक नई कहानी मिली, जैसे वहां की हवा में ही इतिहास घुला हुआ हो!
प्र: आधुनिक समय में इन प्राचीन बेकजे स्थलों का क्या महत्व है और ये हमें आज के जीवन में क्या सिखा सकते हैं?
उ: यह सवाल बहुत अच्छा है! मैं भी यही सोचती थी। इन प्राचीन स्थलों का महत्व सिर्फ उनकी ऐतिहासिकता में नहीं है, बल्कि वे हमें आज भी बहुत कुछ सिखाते हैं। पहली बात, ये हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। आज जब हम सब इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, अपनी पहचान को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। बेकजे की कला और शिल्प हमें उस समय के लोगों की रचनात्मकता और धैर्य के बारे में बताते हैं। दूसरी बात, ये स्थल हमें संरक्षण का महत्व सिखाते हैं – कैसे पुरानी चीजों को सहेज कर रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनसे सीख सकें। जब मैंने वहां की भव्यता को देखा, तो मुझे लगा कि कैसे एक सभ्यता ने इतने शानदार काम किए। यह हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में कुछ ऐसा करें जो समय की कसौटी पर खरा उतरे। ये सिर्फ पत्थर और इमारतें नहीं, ये हमें प्रेरणा देते हैं, हमारे अंदर अपने इतिहास के प्रति गौरव और भविष्य के लिए आशा जगाते हैं।






